Posts

ख़ुद की तलाश का ज़रिया रहा अभिनय : पापिया दासगुप्ता

Image
  ख़ुद की तलाश का ज़रिया रहा अभिनय पापिया दासगुप्ता रंगमंच पर अपनी रौबदार आमद लिए लगभग आधी सदी तक सक्रिय रहने वाली अभिनेत्री पापिया दासगुप्ता ने जीवन के रंगमहल को अलविदा कह दिया। बंगाल उनकी सरज़मीं   रही और भोपाल कर्मभूमि। अभिनय उनका जुनून था , आत्मा की पुकार था। रंगमंच से लेकर रेडियो तक जाने कितनी कहानियाँ और किरदार उनकी अदायगी में ढलते रहे। कुछ दिन पहले ख़ासे इसरार के बाद उन्होंने लम्बी बातचीत की हामी भरी। गुजि़श्ता सुनहरा दौर याद किया और आज के सूरते - हाल पर भी अपनी राय ज़ाहिर की। पापियाजी के रंग योगदान का सादर सुमिरन करते हुए साझा है उनसे हुई विनय उपाध्याय की यह वार्ता।   कैसा लगता है अतीत से गुफ़्तुगू करते हुए। वो दौर ... ये दौर ...?? मेरे लिये जीवन के सभी पड़ाव महत्वपूर्ण हैं। मैं किसी भी कालखण्ड को बेहतर या कमतर नहीं मानती। जीवन में सभी काल का महत्वपूर्ण , पर अलग - अलग योगदान रहता है। मेरी रंगयात्रा की गति धीमी जरूर हुई ...